संत सतगुरु कबीर साहिब जी की जयंती गुरुवार को सतगुरु सजीवन सेवा आश्रम ऑफिसर क्लब में धूमधाम के साथ मनाई गई. आज कबीर साहब जी की 620वां जन्म दिवस के अवसर पर आश्रम में भजन कीर्तन का आयोजन किया गया और झंडोतोलन किया गया. इसके बाद लोगों के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया. गौरतलब है कि कबीर 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे. वह हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग के प्रवर्तक थे. निर्गुट विचारधारा को मानते थे. उनकी रचनाओं का काफी असर पड़ा. कबीर के शिष्यों ने फिर उनकी विचारधारा पर एक पंथ की शुरुआत की, जिसे कबीर पंथ कहा जाता है. माना जाता है कि देशभर में करीब एक करोड़ लोग इस पंथ से जुड़े हुए हैं. हालांकि ये पंथ भी अब कई धाराओं में बंट चुका है. कबीरदास ने स्वयं ग्रन्थ नहीं लिखे. वो केवल मुंह से बोलते थे. उनके भजनों और उपदेशों को शिष्यों ने लिपिबद्ध किया. ये रामनाम की महिमा गाते थे, एक ही ईश्वर (एकेश्वरवाद) को मानते थे. कर्मकाण्ड के घोर विरोधी थे. अवतार, मूर्ति, रोजा, ईद, मस्जिद, मन्दिर को नहीं मानते थे. वो उपनिषदों के निर्गुण ब्रह्मा को मानते थे. साफ़ कहते थे कि वही शुद्ध ईश्वर है, चाहे उसे राम कहो या अल्ला. (सुब्रत गुहा की रिपोर्ट)
कटिहार में धूमधाम से मनाया संत कबीर का जन्मोत्सव
Reviewed by Sailesh kumar
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12:00 AM
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